दर्शन को अखियाँ प्यासी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दर्शन को अखियाँ प्यासी है

कब दर्शन होगा श्यामधनी,

मुझ निर्धन के घर आँगन में कब आवन होगा श्याम धनि

दर्शन को अखियाँ प्यासी है

मेरे घर में तुम्हे बिठाने को ना चोंकी न सिंगासन है,

ना दीपक है न बाती है ना अक्शत है न चन्दन है,

शदा के फूलो से अभिनंदन होगा श्याम धनि

दर्शन को अखियाँ प्यासी है

सावन भादों दोनों बीते और बीती होली दीवाली है,

पर मुझे देखने नही मिली तेरी सूरत भोली भाली है

ना जाने किस दिन अखियो को पग प्रसन होगा श्याम धनि

दर्शन को अखियाँ प्यासी है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।