पिली पालकी में घर मेरे आया

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

पिली पालकी में घर मेरे आया ओ सचा साईं मेरे मालका

शिर्डी शहर में मेहरा बरसाईया

गाओ वालिया ने खुशियाँ मनाईया

द्वारका माई में घुना लगाया

ओ सचा साईं मेरे मालका

डूबते भगता नु तुसा ने बचाया

डूबती बची नु तुसा ने बचाया

डूबते भगता नु बने लाया

ओ सचा साईं मेरे मालका

दर तेरे ते बाबा पवन भी आया

चरणों में तेरे शीश झुकाया,

मुह माँगा फल वो पाया

ओ सचा साईं मेरे मालका

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।