आयो कहाँ से घनश्याम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आ आ आ रे …

आयो कहाँ से घनश्याम॥

रैना बिताई किस धाम ॥

हाय राम

आयो कहाँ से …

हाँ रात की जागी रे ॥

अँखियाँ हैं तोरी

रात की जागी रे अँखियाँ हैं तोरी

हो रही गली गली जिया की चोरी ॥

हो नहीं जाना बदनाम हाय राम

आयो कहाँ से …

सज धज तुमरी का कहूँ रसिया

धनिध ध

धनिध ध

मधप गपम रेमग

मगस निस निस निसगमग

सगम पनिगम

पनिस गमगसा निनिप मगस प

सज धज तुमरी का कहूँ रसिया

ऐसे लगे तेरे हाथों में बँसिया ॥

जैसे कटारी लियो थाम हाय राम ॥

आयो कहाँ से …

हाँ मैं ना कहूँ कछु मोसे ना रूठो॥

तुम ख़ुद अपने जियरा से पूँछो ॥

बीती कहाँ पे कल शाम

आयो कहाँ से …

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।