सालासर के मंदिर में

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

थारे झांझ नगाड़ा बाजे रे बाजे रे सालासर के मंदिर में हनुमान विराजे रे

हनुमान विराजे रे जटे बजरंग विराजे रे

थारे झांझ नगाड़ा बाजे रे

भारत राजस्थान में है सालासर इक गाँव

सूरज सामी बन्यो देव रो महिमा अपरम्पार

थारे लाल ध्वजा फेरावे रे

सालासर के मंदिर में हनुमान विराजे रे

ना रे ऋ गिनती नही बाबा सुवर्ण छत्र हजार

दूर देश रा दर्शन करने आवे नर और नार

बाबो अटको काज सवारे रे

सालासर के मंदिर में हनुमान विराजे रे

चैत सुधि पूनम को मेलो भीड़ लगे अति भारी

नर नारी तेरो दर्शन करने आवे भारी भारी

थारे जात झडुला लागे रे

सालासर के मंदिर में हनुमान विराजे रे

राम दूत अंजनी के सूत को धरो हमेशा ध्यान

चैन सी चरणों का चाकर लाज राखो हनुमान

बाबो बेडो पार लगावे रे

सालासर के मंदिर में हनुमान विराजे रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।