आये मेरी माँ के पावन नवराते

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - छू कर मेरे मन को किया

आये मेरी माँ के पावन नवराते

घर घर मे होंगे , मैया के जगराते

आये मेरी माँ .....

दर्श बिना मुझको , आये न माँ अब चेन

माँ तुमसे मिलने को , तेरा लाल हुआ बेचैन

गिन गिन के गुजारे , माँ हमने दिन राते

आये मेरी माँ .....

जिस घर आये माँ , उस घर का भाग्योदय

छाये वहाँ खुशहाली , ये कहता आज अजय

दिलबर माँ के दर से , पाई है सौगाते

मैया के दर से , मिली " दिलबर ' कई सौगाते

आये मेरी माँ .....

दिलीप सिंह सिसोदिया

" दिलबर "

नागदा जक्शन म.प्र.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।