पहाड़ो का नज़ारा वो मुझे अब याद आता है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पहाड़ो का नज़ारा वो मुझे अब याद आता है

हर इक बन्दा है मस्ताना दीवाना याद आता है

पहाड़ो का नज़ारा वो मुझे अब याद आता है

चडाई के समय माँ के हजारो लाल थे संग में

थी चेहरे पर ख़ुशी की भूख झलक माँ के रंगे रंग में

बंधा सिर पे सभी के वो दुपटा याद आता है वाली

हर इक बन्दा है मस्ताना दीवाना याद आता है

पहाड़ो का नज़ारा वो मुझे अब याद आता है

वो टेडी मेडी पगडनडी चले सब लाल मिल कर के

जुबा पर माँ का जयकारा भजन माता के गा कर के

वो भजना ढोल का अक्सर

मुझे अब याद आता है

हर इक बन्दा है मस्ताना दीवाना याद आता है

पहाड़ो का नज़ारा वो मुझे अब याद आता है

पहाड़ो की हरी बाधी वो सब के मन को बाहती है

बिछी चादर थी बर्फीली सभी का दिल लुभाती है

वो छम छम गिरती बारिश में भी जलना याद आता है

हर इक बन्दा है मस्ताना दीवाना याद आता है

पहाड़ो का नज़ारा वो मुझे अब याद आता है

चली है जीत की टोली

दर्श माता के करने को

उजाड़ी संग योगी है

चलाई शान दर्शन को

भवन भेरो का घाटी पर मुझे अब याद आता है

हर इक बन्दा है मस्ताना दीवाना याद आता है

पहाड़ो का नज़ारा वो मुझे अब याद आता है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।