नजरे रही है तुम्ही को निहार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नजरे रही है तुम्ही को निहार दर्श दोगे कब मुझको हे लख दातार

यु होता नही मुझसे अब इन्तजार दर्श दोगे कब मुझको हे लख दातार

दूर तुझसे रह न सकू जिया जाए न

दर्श बिना नैन मेरे चैन पाए न

दिल को ये लगी कब से आस है जाने कब बुजेगी मेरी प्यास है

श्याम मेरे दिल को कब आएगा करार

नजरे रही है तुम्ही को निहार दर्श दोगे कब मुझको हे लख दातार

जिन भगतो के दिल में विराजे शीश के दानी

उन भगतो की होती नही संसार में हानी,

मेरी जिन्दगी का तू है सवेरा

अपने भगतो के दिल में करता तू बसेरा,

हारे का सहारा मेरा बाबा लखदातार

नजरे रही है तुम्ही को निहार दर्श दोगे कब मुझको हे लख दातार

दास की अरदास सुनो घर मेरे आओ

अगर आप आ न सको तो मुझे बुलाओ

नीरज पर तू ही रेहना सहाई

तूम ही प्रभु मेरे हम राइ,

तीन वां धारी नीले घोड़े पे सवार

नजरे रही है तुम्ही को निहार दर्श दोगे कब मुझको हे लख दातार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।