ठुमुक ठुमुक चली आओ महारानी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ठुमुक ठुमुक चली आओ महारानी

लक्ष्मी महारानी आे लक्ष्मी महारानी

हां मैने तेरे लिए चौक पुराया है

प्रेम से आसन लगाओ महारानी

हां मैने तेरे लिए चन्दन घिसा है

सोलह श्रृंगार करो महारानी

हां मैने तेरे लिए भोग बनाया है

छप्पन भोग पाओ महारानी

हां मैने तेरे लिए बीड़ा लगाया है

हौले हौले से चबाओ महारानी

हां मैने तेरे लिए सेज बिछाया है

फूलों सी सेज पर सो आे महारानी

नीलम अग्रवाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।