चुनरिया मात भवानी की मैने जयपुर से मगवाई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चुनरिया मात भवानी की,

मैने रातो रात सजाई

मैने रातो रात सजाई

मैने प्रेम से उसे बनाई

लाल रंग की प्यारी प्यारी

गोटा पट्टी लगी किनारी

कुंदन की चमक निराली

चुनरिया मात भवानी की,

मैने रातो रात सजाई

मैने रातो रात सजाई

मैने प्रेम से उसे बनाई

रेशम के बूटे बड़े बड़े

उनपे सितारे मैने जड़े

घुघरू की लगा दी लडी

चुनरिया मात भवानी की,

मैने रातो रात सजाई

मैने रातो रात सजाई

मैने प्रेम से उसे बनाई

बड़े प्यार से मां को पहनाई

मां भी हल्का सा मुसकाई

मां की कृपा हुई निराली

चुनरिया मात भवानी की,

मैने रातो रात सजाई

मैने रातो रात सजाई

मैने प्रेम से उसे बनाई

नीलम अग्रवाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।