जय जय विष्णु प्रिये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय जय जनक सुनन्दिनी, हरि वन्दिनी हे।

दुष्ट निकंदिनि मात, जय जय विष्णु प्रिये ।

सकल मनोरथ दायनी, जग सोहिनी हे।

पशुपति मोहिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये।

विकट निशाचर कुंथिनी, दधिमंथिनी हे ।

त्रिभुवन ग्रंथिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये।

दिवानाथ सम भासिनी, मुख हासिनि हे।

मरुधर वासिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये।

जगदंबे जय कारिणी, खल हारिणी हे।

मृगरिपुचारिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये।

पिपलाद मुनि पालिनी, वपु शालिनी हे।

खल खलदायनी मात जय जय विष्णु प्रिये।

तेज - विजित सोदामिनी, हरि भामिनी हे।

अहि गज ग्रामिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये।

घरणीधर सुसहायिनी, श्रुति गायिनी हे।

वांछित दायिनी मात जय जय विष्णु प्रिये ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।