नवरात्रे माँ का नवरात्रे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

झूमे श्रदा से मन आ गाये नवराते माँ के नवराते

मुरादे और मन्नते पूरी करने सभी शेरावाली संग लेके आ गये,

नवरात्रे माँ का नवरात्रे

जब जो माँगा हम को मिला है नव नो दुर्गा से,

बीच भवर थी नाव निकाली

शकती रूपा जगदम्बा ने

भव से पार है लगाने आ गये,

नवरात्रे माँ का नवरात्रे

शपत शती का पाठ करेगे माँ से मन की बात करेगे

चिंता नही चिंतन ही करेगे गंगा सवरूप की धार संग बहेगे

अमृत भी बिगाने आ गए

नवरात्रे माँ का नवरात्रे

गनपत भेरो हनुमत के संग मात निराली अन धन देगी

ज्योत परशादियाँ पवन रूप में माँ संजीव् को दर्शन देगी

गाओ भेटे भजन आ गाये

नवरात्रे माँ का नवरात्रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।