वैसा ही होना जग में जैसा साईं सुहाई

पारंपरिक
माँ गंगा भजन साईं भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

वैसा ही होना जग में जैसा साईं सुहाई

उस मन में ज्योत जागी बैठी जो द्वारका माई

पर्वत से उतरी गंगा साईं के दर्शन करने

कोडी भी चंगा होए साईं के दर्शन करके

इक सांचा साईं जग में जिस के लगन लगाई

उस मन में ज्योत जागी बैठी जो द्वारका माई

जीवन ये रंग चाहे अब साईं के रंग से सारे

साईं ही साईं संग हो दूजा न कोई भाये

इक सांचा साईं जग में जिस से लगन लगाई

उस मन में ज्योत जागी बैठी जो द्वारका माई

दुःख तेरे कट जायगे साईं है संग में तेरे

रस्ते सवर जायंगे साईं है संग में तेरे

इक सांचा साईं जग में जिस की लगन लगाई

उस मन में ज्योत जागी बैठी जो द्वारका माई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।