चली है पालकी साईं की पालकी

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

किस्मत वाला दिन है आया॥

ख़ुशी है कमाल की,

चली है पालकी साईं की पालकी,

पालकी चली साईं की पालकी चली॥

बीड लगी भगतों की बाहरी ॥

चेहरों पर छाए खुशाली ॥

जो भी मुरदे भगतों ने मांगी ॥

साईं ने झोली मैं ढाल दी,

चली है पालकी ......

उपर दीप जगी है ज्योति॥

सुख सागर के भरदे मोती॥

बेठे पालकी मैं खुद आके॥

जो दुनिया के करानी

चली है पालकी ......

साईं मेरे शिरडी वाले ॥

भगतों पर किरपा करने वाले ॥

जो भी साईं दवारे आया

उस की मुसीबत ताल दी

चली है पालकी ......

साईं मेरे है मतवाले ॥

भगतों के है रखवाले॥

जो भी मुरादे भगतों ने मांगी॥

साईं ने झोली में ढाल दी

चली है पालकी ......

पालकी चली साईं की पालकी चली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।