मैं बलिहारी तेरी ज्योता तो बलिहारी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं बलिहारी तेरी ज्योता तो बलिहारी

पौनावाली तेरी ज्योता तो बलिहारी

नगर नगर अस्थान तुम्हारा हर था ज्योत न्यारी

तेरी ज्योता तो बलिहारी

मैं बलिहारी तेरी ज्योता तो बलिहारी

बचेया दी गल सुंदीया मावा जी करदा तेनु चिठियाँ पावा

लिखा की तेरा सिर नावा है चारो दिशा तुम्हारी

तेरी ज्योता तो बलिहारी

मैं बलिहारी तेरी ज्योता तो बलिहारी

चिठी विच की नाम उचारा इस दाती दे नाम हजारा

तू ही ज्वाला तू ही वैष्णो तू ही आर्धक्वारी

तेरी ज्योता तो बलिहारी

मैं बलिहारी तेरी ज्योता तो बलिहारी

राजेश्वरी माँ भदर काली तू कल्याणी काँगडे वाली

चिन्तपुरनी माँ चिंता हरनी भगता दी हित कारी

तेरी ज्योता तो बलिहारी

मैं बलिहारी तेरी ज्योता तो बलिहारी

गुजरात में अम्बा देवी मुंबई में मुम्बा देवी,

तू काली कलकते वाली,

खडक हाथ में धारी तेरी ज्योता तो बलिहारी

मैं बलिहारी तेरी ज्योता तो बलिहारी

अपनी ज्योत से ज्योत जगा दो मेरे पाप अपराध जला दो

मन दर्पण को निर्मल करदो मैं देखू छवि तुम्हारी

तेरी ज्योता तो बलिहारी

मैं बलिहारी तेरी ज्योता तो बलिहारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।