एक दिन चंदा नील गगन में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

एक दिन चंदा नील गगन में

सोच के डूबे अपने मन मे जरा सी बात पे

सब सोए मैं क्यों जागूं रात में ,

अरे चांदनी जैसी रंगत मेरी अंग का रंग सुनेहरा

मैं हूं अकेला फिर भी तारो का क्यों रेहता पेहरा

सुधमा संग दकेह मुस्काये मन में आंसू क्यों भर लाये जरा सी बात से

कि सब सोए मैं क्यों जागूं रात में ,

अरे लक्ष्मी मेरी सगी बहन है घर घर पूजी जाती

मेरी कोई कदर नहीं है वो माता कहलाती

मुझसे धीर धरी ना जाए जरा सी बात पे

सब सोए मैं क्यों जागूं रात में

विष्णु बोले सुनो चंद्रमा बंद करो हंगामा

आज से दुनिया कहेगी तुमको चंदा मामा

कि करवाचौथ को पूजे जाओ

घर घर में खुशहाली लाओ जरा सी बात पे

सब सोए मैं क्यों जागूं रात में

तब से चंदा मामा हो गए नील गगन के वासी,

सुन्दरता भी शरमाये जब आये पुरमाशी

देते अलख को चोट करारी कसी ये यो दुनिया सारी,

जरा सी बात रे

सब सोए मैं क्यों जागूं रात में

Writer by Sachin singh thakur

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।