चंदीपुर में मेरे चमके सितारे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चंदीपुर में मेरे चमके सितारे

मेरी माँ ने मुझे दिए सुख सारे

इस जग से मुझको क्या लेना क्या लेना

चंदीपुर में मेरे चमके सितारे

याहा चेत कवार में लगाता पुरे नो दिन का मेला

माँ की किरपा से मिट ता जीवन का सारा जमेला,

भगत आते रात दिन मिले सब कुछ मांगे बिन मेरी मैया के जैसा कोई न

चंदीपुर में मेरे चमके सितारे

माँ जगजननी जगदम्बे संग बैठीफूल कली मैया,

दुःख विपता मिटावे भवानी

बन के भगतो की सहईया

माता का अद्भुत शिंगार दुनिया में है जय जय कार

मुझे भी चरणों में ही रखना

चंदीपुर में मेरे चमके सितारे

कण कण में है मैया रानी अबास यही होता है,

चंदीपुर धाम में आके अहसास यही होता है

अरुण बनाये ऐसा धाम गूंजे जय माँ सुबहो शाम

गुण गाये देविंदर भी सुन लो माँ सुन लो माँ

चंदीपुर में मेरे चमके सितारे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।