मेरी मंजिल ने पार लगाइये

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

काँधे कावड उठा ली भोले मन में दर लिया ध्यान तेरा

मेरी मंजिल ने पार लगाइये मनाऊ गा एहसान तेरा

धनी दिन से सोचु था मैं हरी द्वार ने आवन ने

मन मेरा भी तडपे गा गंगा में घोटे लावन ने

भोला भाला जमीदार सु हरियाने में गाव मेरा

मेरी मंजिल ने पार लगाइये मनाऊ गा एहसान तेरा

म्हारे गाव के मंदिर में हो बाबा तने नुहाउगा

धिस धिस चन्दन करू कटोरी माथे चन्दन लगाऊ गा

धुप दीप से करू आरती फिर गाऊ गुण गान तेरा

मेरी मंजिल ने पार लगाइये मनाऊ गा एहसान तेरा

लाडू पेडे खावे को न आक धतुरा ल्याऊ गा

काची काची भांग घोट के भर भर लोटे पिलाउगा

तू ही मेरा मात पिता है तू ही है भगवान मेरा

मेरी मंजिल ने पार लगाइये मनाऊ गा एहसान तेरा

इतनी सुन के टेर जाट की प्रशन हो गे बम भोले

हरयाने के खेता में फिर बरसे चांदी गोले

तेरी जय हो ओहगडदानी दिनेश करे गुणगान तेरा

मेरी मंजिल ने पार लगाइये मनाऊ गा एहसान तेरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।