जागरण की रात मियाँ रात भर आई है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जागरण की रात मियाँ, रात भर जगाई है॥

अभी भी ना आई रानी सवेर होने अई है॥

जागरण की रात मियाँ.....

मन मैं और कुछ भी नही दर्शन की प्यास है॥

आखे पथरा गई है, चेहरा उदास है॥

लोटा तेरे दर से मियाँ कोई ना सवाली है

अभी भी ना आई रानी.....

जब से लगे ये तेरे नैना माँ तेरे दरबार से॥

डोल जाइये यह सिंगासन मेरी पुकार से,॥

हाथ मेरे कुछ भी नही पूजा की थाली है

अभी भी ना आई रानी........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।