तू मेरे रूबरू मैं तेरे रूबरू

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तू मेरे रूबरू मैं तेरे रूबरू

रहमतों का निशाँ और क्या चाहिए

तू कहे कुछ मुझे मैं कहूं कुछ तुझे

और कुछ भी न इसके सिवा चाहिए

तू मेरे रूबरू...............

चंद पल हमको देदे दीदार के

ख़त्म करदे ये दिन इंतज़ार के

सब ये परदे हटा सामने आ ज़रा

अब तू ज़िद ही समझ या समझ प्रार्थना

दर्द ए दिल को तुझी से दवा चाहिए

तू मेरे रूबरू...............

इश्क़ या या जुनूं है या बंदगी

नाम लिख दी तेरे अपनी ज़िन्दगी

अब है बारी तेरी लाज रखना मेरी

हंस ना दे ये जहां मेरे हालात पे

गौर करना तुझे भी ज़रा चाहिए

तू मेरे रूबरू...............

कब ये माँगा क सारा जहान दे

मांग है ये बस थोड़ा ध्यान दे

ये हंसी पल ना हो आज है कल ना हो

ना बहाने बना और साहिल से तू

अब तो सजदों का मिलना सिला चाहिए

तू मेरे रूबरू...............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।