तू कितनी अच्छी है तू

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॥ पावन पाठ ॥

ओ माँ ओ माँ ओ माँ प्यारी मा...........

तू कितनी अच्छी है तू कितनी भोली है ओ प्यारी प्यारी है

ओ माँ ओ माँ ओ माँ प्यारी मा...........

ये जो दुनियाहै वन हैं काँटों किआ तू फुलवारी है

ओ माँ ओ माँ ओ माँ प्यारी मा...........

अपना नहीं तुझे सुख दुःख कोई

मैं मुस्काया तू मुस्काई मैं रोया तू रोइ

मेरे रोने पे मेरे हंसने पे तू बलिहारी है

ओ माँ ओ माँ ओ माँ प्यारी मा...........

दुखन लागि है माँ तेरी अँखियाँ

मेरे लिए जाएगी है तू सारी सारी रतियाँ

मेरी निंदिया पे अपनी निंदिया भी तूने वारि है

ओ माँ ओ माँ ओ माँ प्यारी मा...........

माँ बच्चो की जान होती है

वो होते हैं किस्मत वाले जिनकी माँ होती है

कितनी सुन्दर है कितनी शीतल है न्यारी न्यारी है

ओ माँ ओ माँ ओ माँ प्यारी मा...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।