चल माँ के दर पे पायेगा मौज

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कब तक उठाएगा तू गम का भोज

चल माँ के दर पर पायेगा मौज

कैसा करिश्मा है मैया के दर

सब की ही मिट ती है चिंता फिकर

कितनो के सिर याहा झुकते है रोज

चल माँ के दर पे पायेगा मौज

देश विदेश में है माँ का नाम

कौन है जिसका बना नही काम

भगतो की आती है लाखो में फ़ौज

चल माँ के दर पे पायेगा मौज

बाते बतादे तू माँ को सभी

देर न कर चल शर्मा अभी

इतना भी रणजीत तू मत सोच

चल माँ के दर पे पायेगा मौज

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।