बांह मेरी भी पकड़ एक बार सांवरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बांह मेरी भी पकड़ एक बार सांवरे

मुझे तेरी बड़ी है दरकार सांवरे

मेरी नैया है बीच बंझधार सांवरे

तेरे हाथो में है मेरी पतवार सांवरे

आके मुझको लगा लड़े उस पार सांवरे

बांह मेरी भी पकड़....................

मेरा तुझपे भरोसा भाड़ा भारी है

लोग कहते तुझे दातारि है

मेरी बारी क्यों देर लगाईं सांवरे

तेरी याद में आँखे भर आई सांवरे

मेरे आंसुओं को देख एक बार सांवरे

मुझे तेरी बड़ी है दरकार सांवरे

बांह मेरी भी पकड़....................

जिसने भावों से तुझको मनाया है

मेरे सांवरे उसी ने तुझे पाया है

नज़रें मुझ पे भी कर मेरे श्याम सांवरे

मेरे दिल का यही है अरमान सांवरे

तुझे मिलने को दिल बेकरार सांवरे

मुझे तेरी बड़ी है दरकार सांवरे

बांह मेरी भी पकड़.................

बड़ी आस लेके दर तेरे आया हूँ

साड़ी दुनिया का सांवरे सताया हूँ

अपने सीने से लगा ले एक बार सांवरे

मुझे सीने से लगा ले एक बार सांवरे

तेरे दास की तू सुनले पुकार सांवरे

राज मित्तल पे कर उपकार सांवरे

मुझे तेरी बड़ी है दरकार सांवरे

बांह मेरी भी पकड़.................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।