हे काली कलकते वाली माँ काली रूप बनाओ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

करो असुरो का नाछ माँ काली

जिसने बुरी नजर है डाली

भीड़ बड़ी भगतो पर काली,

आकर हमे बचाओ

हे काली कलकते वाली माँ काली रूप बनाओ

काले पाए वस्त्र माँ ने काला रूप बनाया,

दुष्टा नु जद काली माँ ने चंडी रूप दिखाया

थर थर कम्बन पापी सारे चुन चुन माँ ने दानव मारे

दिने विखाए सब नु तारे

काली पाप हटाओ

हे काली कलकते वाली माँ काली रूप बनाओ

काले काले शशत्र माँ ने हथा विच सजाये,

बड़े बड़े राक्शक माँ ने ऐसे पड़ने पाए

इक हथ त्रिशूल है सजदा दूजे दे विच शंख है भ्ज्दा

बाज नु सुन के पापी है भ्ज्दा केह्न्दा मेनू बचाओ

हे काली कलकते वाली माँ काली रूप बनाओ

काली नेरी काली रात है पापियाँ ते अज छाई,

काली चण्डी रूप तार के लीला ओस दिखाई

मसताने ते किरपा करदो खाली झोली मेरी भरदो

सारे दुखड़े काली हरदो गम दूर हटाओ

हे काली कलकते वाली माँ काली रूप बनाओ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।