जय जय वैष्णो मैया पार लगाओ नैया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अनुपम कन्या रूप सलोना वैष्णो उसका नाम है

सतसंघ पर्वत पर रेहती त्रिकुट घाटी पर धाम है

जय जय वैष्णो मैया पार लगाओ नैया

त्रेता युग में अधर्म बड़ा पाप की काली आंधी छाई,

पांच नमा शक्ति ने मिल के तृप्त तेज किरने भिखराई,

तेज कुञ्ज घन घोट हो आत सुंदर इक बालिका आई

पांच जगो की मिली शक्तियां इस कन्या में समाये,

जय जय वैष्णो मैया पार लगाओ नैया

मन सवा कर कर्म न तीनो देवियाँ से के आई

ज्ञान कुञ्ज आलोकित हो के कष्ट भी बम आंबे महामाई

राम जी की आज्ञा लेकर गेह्बर में तप करने आई

भेरव नाथ को घर से निकाला मुक्ति की राह दिखाए

जय जय वैष्णो मैया पार लगाओ नैया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।