पांच अंक जग में महान

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॥ पावन पाठ ॥

आओ भगतो तुम को सुनाये पांच के अंक की लीला बताये

मान जाएगा सारा जहान पांच अंक जग में महान

पांच फल परशाद में पंच मेवा साथ में

होता देवो का भी पंच अस्नान पांच अंक जग में महान

पांच पकवानों का धर्म में महत्व है,पांच रतन पांच इन्द्रियां है

प्रभु वंदना में चरणों का अमृत पंचाअमृत बन के बहा है,

ग्रेह कुंडली का चकर पंचांग के मुख पर

सुरों में अचल रहे पंचम का स्थान पांच अंक जग में महान

कछा किरपान केश कंगे कड़े से सिख धर्म पांच से जुडा है

धरती आकाश अगनी जल और वायु सब पे पंच तत्वों की किरपा है

पांडव थे पांच और उँगलियाँ भी पांच है,

सरकार पांच वर्ष की है मेहमान

पांच अंक जग में महान

पांचो से बनती है पेहले पंचायात मुखियां संजीव सरपंच है

बेठ जिस चबूतरे पे लेते वो निरने पांच से ही सजता वो मंच है

पंच मुखी देव भी होती पंचारती,

नमाज पांच वक़्त पड़े मुश्ल्मान

पांच अंक जग में महान

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।