बाबा तो पालनहारा है हारे का सहारा है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

खाटू का मेला आया मेरा श्याम देख मुस्काया,

रिंग्स से ध्वजा उठा कर फिर श्याम ध्वजा लेहराया,

बाबा तो पालनहारा है हारे का सहारा है,

खाटू के मंदिर की है तू इंतनी प्यारी मूरत

जो दर्शन करता है हो पूरी उसकी ममंत

फिर सवा मनी वेह करता जब बिगड़ा काम स्वरता

जग की सारी खुशियों से ये सब की झोली भरता

बाबा तो पालनहारा है हारे का सहारा है,

खाटू का तोरण द्वारा है लगता सब को प्यारा

जो भी धोक लगाये हो जाए वारा न्यारा,

जब श्याम कुंड में नहाए फिर कष्ट सभी मिट जाए

बाबा पर ध्वजा चड़ा कर फिर मन की मुरादे पाए

बाबा तो पालनहारा है हारे का सहारा है,

नीले पर चढ़ कर आता मेरे सिर पर हाथ फिराता

जब भी संकट आता ये मोर छड़ी लेहरता,

जब मोर छड़ी लहराये दुःख के बादल छट जाए

हो बीच भवर में नैया उसे आकर पार लगाये

बाबा तो पालनहारा है हारे का सहारा है,

खाटू के कं कं में है बाबा की छवि निराली,

फागुन मेले में आते चहू और से नर नारी,

ऐसा आनद है आता मेरा श्याम देख मुस्काता

पुलकित सिंगला भी आता बाबा को भजन को सुनाता,

बाबा तो पालनहारा है हारे का सहारा है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।