पधारो मैया पढू मैं पइयां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पायल झूम झूम छन छन बाजे आगि प्यारी मैया

परम किरपा मई बीच भवर से पार करे गी नैया

पधारो मैया पढू मैं पइयां

पल में कोयल मन बन जाए,

मीठे भजन सुनाये पेहले माँ की पूजा करलू फिर हलवा भटवाये

पधारो मैया पढू मैं पइयां

पचरंगी चुनर मैं चडाऊ हीरे की नथ लाऊ

प्याल घुंगरू डार च्डाऊ मोतियाँ माला लाऊ

पैरो में आलता लगाऊ मेरी माँ

सुंदर सुंदर बिछिया पेह्नाऊ मेरी माँ

पल के प्यारी सुंदर मैया नैनो में बस जईया

पका सहारा तेरा मैया तुम ही एक खवैयाँ,

पधारो मैया पढू मैं पइयां

पीला सुनेहरा शेर है माँ का सुंदर आँखे प्यारी

पेहरा हनुमंत लाल का रेहता भेरव आगेया कारी,

पल पल निहारु तुम्हे प्यारी प्यारी माँ बलहारी जाऊ मैं तो प्यारी प्यारी माँ

पनघट से गगरी भर लाऊ जल सेवा करू मैया

परम किरपा मई बीच भवर से पार करेगी नैया

पधारो मैया पढू मैं पइयां

पतित पावनी भकत वसला माँ भगतन हित कारी

पावन धाम है माँ के सारे दर्शन की बलिहारी,

पवित्रा सारी तुम से है माँ भगती की धारा भी तुम से है माँ

प्यार सभी के मन में जगाए प्रेमा मई मेरी मैया

परम किरपा मई बीच भवर से पार करेगी नैया

पधारो मैया पढू मैं पइयां

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।