तुमने बदलदी मेरी जिंदगानी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तुमने बदलदी मेरी जिंदगानी

अपनी किरपा से अपनी दया से हे महारानी

तुमने बदलदी मेरी जिंदगानी

चारो तरफ से उल्जा सा गम से

खुशिया हमारी रूठी थी हम से

मुझको हसाया जीना सिखाया

तूने आंबे रानी

तुमने बदलदी मेरी जिंदगानी

मुझपे पड़ी तेरी जब से नजर है

तेरी नजर का पा ये असर है,

खाव्ब हमारे सच हुए सारे करी मेहरवानी

तुमने बदलदी मेरी जिंदगानी

खत्म हुई जीवन की हलचल

अब तो गुजर ते मौत से हर पल

चमकी कुंदन अंजन की किस्मत,

मिटी परेशानी

तुमने बदलदी मेरी जिंदगानी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।