तारा विना श्याम मने एकलडु लागे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तारा विना श्याम मने एकलडु लागे,

रास रमवा ने वेलो आवजे

तारा विना श्याम एकलडु लागे

शरद पूनम नी रातडी ओहो,

चांदनी खिली छे भली भांत नी

तू न आवे तो श्याम,

रास जामे न श्याम

रास रमवा ने वेलो आव श्याम,

तारा विना ….

गरबे घूमती गोपियो ओहो,सूनी छे गोकुल नी शेरीयो

सूनी सूनी शेरियो मा,गोकुल नी गलियों मा

रास रमवा ने वेलो आव श्याम,रास रमवा ने वेलो आवजे

तारा विना ….

अंग अंग रंग छे उमंग नो ओहो,रंग केम जाए तारा संग नो

पायल झंकार सुणी,रोदिया नो नाद सुणी

रास रमवा ने वेलो आव श्याम,रास रमवा ने वेलो आवजे

तारा विना ….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।