चल माता के दरबार

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

चल माता के दरबार

हम उसे मनायेगे कुछ फूल चड़ायेगे

वो शिव पटरानी है वो वैष्णो रानी है

चल माता के दरबार ....

वो शेरोवाली है वो भोली भाली है

वो अपने बचो की करती रखवाली है,

डोली में बेठा कर हम उसको घर लायेगे

चल माता के दरबार ....

है जिसकी ज्योति से सारी दुनिया रोशन

अब तरस जीवन में जो बरसादे सावन

शरदा के फूलो में हम उसे झुलायेगे

चल माता के दरबार

सब उसको प्यारे है नैनो के तारे है

उनपर भी रहम करती जो जीवन हारे है

उन चरणों में बेहती गंगा में न्हायेगे

चल माता के दरबार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।