खेल तुम्हारे जग से निराले है डमरू वाले हो डमरू वाले

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

खेल तुम्हारे जग से निराले है डमरू वाले ओ डमरू वाले,

सब देवों में हो भोले भाले है डमरू वाले ओ डमरू वाले,

सिर गंगा मुख चंदा सोहे

गौरी गणपति मन को मोहे

पिये हलाहल भंगिया के प्याले है डमरू वाले ओ डमरू वाले

हे त्रिपमुरारी त्रिनेत्र धारी,

लीला धारी भोले भंडारी,

तू ही गिराए तू ही संभाले है डमरू वाले ओ डमरू वाले,

डगमग डोले जीवन नैया ,

बन जाओ तुम नाथ खिवैया,

तुमने सदा सब के कष्ट टाले है डमरू वाले ओ डमरू वाले ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।