॥ पावन पाठ ॥
कब रिझोगी प्यारी श्यामा,
कब रिझोगी प्यारी राधे॥
विछे भाग लूट त है मोहे॥ ,
करुणा सिन्धु' आगा दे राधे,॥
कब रिझोगी प्यारी राधे॥
इक तुम ही अब लम्बनाग्री,॥
अब तुम ही साथ दे राधे॥
कब रिझोगी प्यारी राधे॥
कब रिझोगी प्यारी श्यामा,
कब रिझोगी प्यारी राधे॥
विछे भाग लूट त है मोहे॥ ,
करुणा सिन्धु' आगा दे राधे,॥
कब रिझोगी प्यारी राधे॥
इक तुम ही अब लम्बनाग्री,॥
अब तुम ही साथ दे राधे॥
कब रिझोगी प्यारी राधे॥