दर नचना मैं तेरे दर नचना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दर नचना मैं तेरे दर नचना॥।

लाल लाल चुनिया गल विच पके ,नचना कमले होके

मैं तेरे दर मैं नचना

मेला लगिया माँ दे दवारे॥,

नाच नाच भंगरे पावो सारे,

तोलिया ही तोलिया पान आज बोलिया॥

नचना मैं कमले होक तेरे दर मैं नचना,

उठ भगता चल माँ नु मना लै,॥

भोली माँ दे दर्शन पा ले,

सुचा दर एहदा कठन पेंदा,॥

जय माँ जय माँ जपना नचना कमले होक,

तेरे दर मैं नचना..

देगी असीसा सब नु अम्बे,॥

दूर नही तेरे तो अम्बे,

सरस्वती माँ लक्ष्मी कालका दा गज के जेकरा लाके ॥

तेरे दर मैं नचना..

जणू भगत वांगु मस्त बना दे॥

मण दी सूती ज्योत जगह दे

मैं ता चरना विच सिर रखके,॥

माँ दा प्यार पाना

तेरे दर मैं नचना...

दर नचना मैं तेरे दर नचना..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।