शिर्डी वाले की कैसी माया

पारंपरिक
श्री राम भजन साईं भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

शिर्डी वाले की कैसी माया बिना तेल के दीप जलाया

पतझड़ के मोसम में देखो प्यार का फूल खिलाया

शिर्डी वाले की कैसी माया बिना तेल के दीप जलाया

शिर्डी में धाम निराला है साईं नाथ मतवाला है

सिर पे पटका बाँध लिया काँधे झोला ढाला है

हाथो में कासा रहमत वाला खुशियाँ भर के लाया

शिर्डी वाले की कैसी माया बिना तेल के दीप जलाया

साईं राम साईं राम भजले प्यारे साईं राम

साईं राम के नाम से बनते देखो सब के बिगड़े काम

शरण पड़े जो दीं दुखी को साईं ने गले लगाया

शिर्डी वाले की कैसी माया बिना तेल के दीप जलाया

सब का मालिक एक है मेरा साईं बड़ा महान,

प्रेम प्यार है सिखलाता सब को माने एक समान

सच केहता गोपाल है भगतो पैगाम ख़ुशी का लाया

शिर्डी वाले की कैसी माया बिना तेल के दीप जलाया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।