सूता रे वे तो जागो नींद सूं

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॥ पावन पाठ ॥

सूता रे वे तो जागो नींद सूं

बाबो थोरे घरे आया ओ

कलियुग रो अवतारी बाबो असली रूप बणाया ओ

सूता रे वो तो जागो नींद सू

रूणीचा में धाम आपरो ज्यांरी लीला न्यारी ओ

मंदिरिया में बैठा बापजी लीले री असवारी ओ

सूता रे वो तो जागो नींद सू

ढोल नगारा नौबत बाजे झालर री झणकारा ओ

आरतियाँ री शोभा प्यारी झाँकी वरणी ना जावे ओ

सूता रे वो तो जागो नींद सूं

भादरवा में मेलो लागे गाँव रूणीचा माँहि ओ

दर्शण करवा दूर दूर तूं आवे नर ने नारी ओ

सूता रे वो तो जागो नींद सूं

भक्त मण्डल री अरज वीणती दुखड़ा सबरा काटो ओ

साँचा मन सूं सेवा करजो भाग जगावेला थांरा ओ

सूतारेवो तो जागो नींद सूं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।