इक जुग से मे तरसा शेरावालिये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

इक जुग से में तरसा शेरावालीये

दर्शन को तेरे में ज्योतावालिये,

पहाड़ावालीये दिलासवालिये

इक जुग से में तरसा शेरावालीये,

दर्शन को तेरे में ज्योतावालिये,

तेरी भक्ती तेरी पूजा अबतो जीवन मेरा,

तेरे कदमो पे दम निकले मन चाहे ये मेरा,

दर्शन के प्यासे भगतो ने केसे तुझे पुकारा

इक जुग से में तरसा शेरावालीये

दर्शन को तेरे में ज्योतावालिये

सब कुछ सम्भव होसकता अदबुद तेरी माया

रूप अनेको घेरे है तूने बदली कितनी काया

इक बार नहीं कही बार तुझे इन भकतो ने है पुकारा

इक जुग से में तरसा शेरावालीये

दर्शन को तेरे में ज्योतावालिये.

पहाड़ावालीये दिलासवालिये

इक जुग से में तरसा शेरावालीये

दर्शन को तेरे में ज्योतावालिये

ललित अजबानी

०९८९०३५५९४०

०९३२०३५५९४०

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।