तेरी धूम मची है धूम

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॥ पावन पाठ ॥

तेरी धूम मची है धूम

फिर क्यों तेरी दया से बाबा मैं तो रहू मेहरूम,

तेरी धूम मची है धूम

कानो सुनी नही है बाबा बात है आँखों देखी

यहा यहाँ दरबार तुम्हारा भीड़ है लाखो देखो

गाओ गाओ और शहर शहर में आया हु मैं घूम

तेरी धूम मची है धूम

हारे का तुम बने सहारा निर्धन को है दोलत देदी,

निर्बल को बल दिया है तुमने लाखो को है शोरत देदी

सब सुख पाया जिसने तेरी चोक्ठ ली है चूम

तेरी धूम मची है धूम

हर दम रेहते साथ भगत के पल पल लाज बचाते हो,

धुप में बन कर शीतल छाया अमृत रस बरसाते हो

तू ही काबा तू ही काशी तू ही मेरा मखदूम

तेरी धूम मची है धूम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।