मेरी ये मुरलीधर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मन में भगवान मिलेगे जिस ने बनाये इंसान

कोई फर्क न दोनों में दोनों इक समान

दोनों है ये प्रेम की मूरत इक दूजे के पहचान

अलग अलग चेहरे सजे चेहरों में भगवान है

गजब दातारी है मेरी ये मुरलीधर,

संसार रचाने वाले ने जग को है खूब सजाया

आप बना वो पत्थर का देखो उस की माया

छोड़ दिया सब उस ने तुज्पे रखी डोरी हाथ

संग संग तेरे वो चला बन के परछाई साथ,

गजब का कारीघर मेरी ये मुरलीधर,

दीं बड़ा है दीना नाथ वो करता तुम से प्यार

तेरे वस् में हर दम रहता क्यों भोला संसार

अपने भगतो के आंसुओ पे रोते है भगवान

इक छोटी सी पुकार पे भेजे रागी अनजान

गजब का कारीघर मेरी ये मुरलीधर,

समय की बदले देखो चाल बदले रंग हजार

छोड़दे उसके आसरे पालनहार ,

ये बंगले सब है उस के तू तो चोंकीदार,

इधर उधर भिखरे खजाने पत झड़ सावन बहार

गजब का कारीघर मेरी ये मुरलीधर,

मुठी भर दाने उपजे लेहरा के खेत हमारा,

चुन चुन पक्षी खाते प्यारे भरता पेट हमारा,

दाना पानी खीच ले जाता सकल मुसाफिर प्यारे

राधिका चंदा सुबह की लाली के चलते इस के इशारे ,

गजब का कारीघर मेरी ये मुरलीधर,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।