कान्हा बेदर्दी है, राधा खत लिखती हैं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा बेदर्दी है, राधा खत लिखती हैं ॥

जब से गये तुम मथुरा को, भूल गए तुम राधा को ॥

तेरी जुदाई ये कान्हा ॥ अब सही ना जाती है

अब तो आजा मोहन तेरी याद सताती है ॥

तेरी याद सताती है, राधा खत लिखती हैं ॥

तेरी याद में मोरनी रोये, पंख ये फैलाये ॥

भूखे डोले गईया बछङे, घास नहीं खाये ॥

अब तो आजा कान्हा तेरी, गायें भटकती है

अब तो आजा मोहन तेरी याद सताती है॥

तेरी याद सताती है राधा खत लिखती हैं ॥

जिनके साथ तुम खेले मोहन, लट्ठ मार होली ॥

दुःखी हो गई वो गुजरिया, ग्वलों की टोली ॥

तेरे बिना ये कुँज गलियां, वीरानी लगती है

अब तो आजा मोहन, तेरी याद सताती है ॥

तेरी याद सताती है, राधा खत लिखती हैं ॥

अब तो इस डगरे में ना कोई, ग्वालन आती है ॥

दही बेचने वाली कोई नजर न आती है॥

तेरे बिना ओ कान्हा सब, गोपियां रोती है

अब तो आजा मोहन तेरी याद सताती है ॥

तेरी याद सताती है, राधा खत लिखती हैं

आजा मोहन प्यारे क्यूं तुम, देर लगाते हो ॥

अपनी राधा रानी को तुम, क्यूँ तङपाते हो ॥

तेरी याद में मैया, दिन रात तङपती है

अब तो आजा मोहन, तेरी याद सताती है ॥

तेरी याद सताती है, राधा खत लिखती हैं ॥

कान्हा बेदर्दी है, राधा खत लिखती हैं

तेरी याद सताती है, राधा खत लिखती हैं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।