लागे जी लागे जी मेरे गणेश प्यारे लागे जी

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

लागे जी लागे जी

मेरे गणेश प्यारे लागे जी

नहाय धुलाय के मैने गणेश आले में है राखे जी

केशर चन्दन लगा तो वो बड़े प्यारे लागे जी

सुन्दर सुन्दर वस्त्र आभूषण मैने उन्हें पहनाए जी

सोने का मुकुट लगा तो वो बड़े प्यारे लागे जी

छप्पन भोग छतीसो व्यंजन मैने भोग लगाए जी

हाथों में लड्डू रखा तो वो बड़े प्यारे लागे जी

धूप दीप कपूर की आरती मैने उनकी उतारी जी

चरणों में फूल रखा तो वो बड़े प्यारे लागे जी

हाथ जोड़ के वंदन कीना माफी उनसे मांगी जी

मिला आशीर्वाद हमें तो वो बड़े प्यारे लागे जी

नीलम अग्रवाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।