खुशहाल रहे परिवार मेरा अरदास करा

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॥ पावन पाठ ॥

खुशहाल रहे परिवार मेरा अरदास करा,

नित वसदा रहे घरवार मेरा अरदास करा

एह रोनक मेले लगे रेहन बाराहा मासे,

खुशियाँ ही खुशिया हों चार पासे,

आबाद रहे संसार मेरा अरदास करा

चिंता न कोई फिकर दिला विच न टिक पावे

दुःख आवे ये आंदे ही साल गुजर जावे,

बरसे हर दम उपकार तेरा,

अरदास करा ....

रहमत दा तेरी दिन राती मैं शुकर करा

चरना दी तेरे धुनी दिन राती धरा

मिल जावे प्यार दुलार तेरा

अरदास करा ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।