देशड़लो रंग रूड़ो राणा जी

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

देशड़लो रंग रूड़ो राणा जी थारो देशड़लो रंग रूड़ो

कोनी पेरूली थारो चूड़ो रे राणा जी थारो देशड़लो रंग रूड़ो

थारे देशां में राणा साधु नहीं थे

लोग बसे सब कूड़ो नहीं भावे राणा देशड़लो रंग रूड़ो

काजळ टीकी राणा म्हें सब कुछ छोड्रया

छोड्यो माथे वालो जूडो रे राणा नहीं पेरूली थारो चूड़ो

देशड़लो रंग …..

मेवा मिसरी राणा सब कुछ छोड्या

छोड़यो शक्कर ने गुड़ो रे राणा जी थारे देशड़लो रंग रूड़ो

देशड़लो रंग …..

तन की आस राणा कबहुं न कीनी,

ज्यूं रण माँहि शूरो रे राणा जी थारो देशड़लो रंगरूड़ो,

देशड़लो रंग

बाई मीरां केवे प्रभुजी गिरधर नागर,

वर पायो मैं पूरो पूरो रे राणाजी थारो देशड़लो रंगरूड़ो

देशड़लो रंग …..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।