ल्यादे रे ल्यादे संजीवन बूटी ल्यादे हनुमत

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

ल्यादे रे ल्यादे संजीवन बूटी ल्यादे हनुमत

तेरे सिवा कोई और नहीं मारी बिगड़ी बात बनादे

में कैया अयोध्या जाऊ कैया माँ ने मुख दिखलाऊ

जद पूछेगी माँ कटे है लक्मण साची बात बतादे

ल्यादे रे ल्यादे...

तू वीर बड़ो है भारी जाने की करो तैयारी

द्रोणगिर पे वेद बताई लक्मण ने लाई पिलादे

ल्यादे रे ल्यादे....

दिन गणो नहीं पावे आथूणो रेह जावे

इतनो सुण चल्यो पवन सूत चरणा में शीश नवाके

ल्यादे रे ल्यादे...

संजीवन हनुमत ले आया ,लक्मण को गोट पिलाया

तुलसी दास भजन कथ गाया ,मारी नैया पार लगादे

ल्यादे रे ल्यादे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।