साथी रे भूल न जाना मेरा प्यार

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॥ पावन पाठ ॥

साथी रे भूल ना जाना मेरा प्यार

मेरी वफ़ा का ऐ मेरे हमदम

कर लेना ऐतबार

साथी रे भूल ना जाना मेरा प्यार

दूर कभी कर दे जो मजबूरी

वो दूरी तो होगी नज़र की दूरी

तेरी दुवाएं गर साथ रही,

आयेगी फिर से बाहर

साथी रे भूल ना.....

काश कभी ये रैना ना बीते

प्रीत का ये पैमाना कभी ना रिते

डर है कही आनेवाली सहर,

ले ले ना दिल का करार

साथी रे भूल ना जाना.......

सिंगर - भरत कुमार दबथरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।