श्री राधे रानी दे डारो बंसी मोरी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्री राधे रानी दे डारो नी बंसी मोरी

अब राधे रानी दे डारो बंसी मोरी

काहे से गाऊँ राधे काहे से बजाऊँ,

काहे से लाऊं गैया घेरी,

श्री राधे रानी दे डारो ..........

मुखड़े से गाओ कान्हा हाथो से बजाओ,

चिटिये से लाओ गैया घेरी,

श्री राधे रानी दे डारो.......

या बंसी में मेरो प्राण बसत है,

सो बंसी गई चोरी,

श्री राधे रानी दे डारो.......

ना सोने की कान्हा ना रूपे की,

हरिये बाँस की पोरी,

श्री राधे रानी दे डारो नी बंसी हमारी,

चन्द्रसखि भज बाल कृष्ण छवि,

चिरंजी रहे जुगल जोड़ी,

श्री राधे रानी दे डारो नी बंसी हमारी,

सिंगर - भरत कुमार दबथरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।