वही मिजाज वही चाल है

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॥ पावन पाठ ॥

एक हमें आवारा कहना

कोई बड़ा इल्ज़ाम नहीं

दुनिया वाले दिल वालों को

और बहुत कुछ कहते हैं

वोही मिज़ाज वोही चाल है ज़माने की

हमें भी हो गई आदत फ़रेब खाने की

वही मिजाज गोरी चाल है ......

मैं सारे शहर में तन्हा नहीं हुआ रुस्वा

सज़ा मिली है तुम्हें भी तो दिल लगाने की

वही मिजाज वहीं चाल......

शराब मिलती है लेकिन हमारी प्यास से कम

अजीब रस्म है साक़ी यहाँ पिलाने की

वही मिजाज वही चाल है........

नज़र बचा के तुम्हें देखता हूँ महफ़िल में

नज़र लगे न कहीं तुमको इस दिवाने की

वही मिजाज गोरी चाल है......

सिंगर - भरत कुमार दबथरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।