शारदे जय हंस वाहिनी

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शारदे जय हंस वाहिनी

जयति वीणा वादिनी

जय सरस्वती ज्ञान दायिनी

कमल हंस विराजनी

शारदे जय हंस वाहिनी जयति वीणा वादिनी

ऋद्धि सिद्धि विवेक दायिनी

तुम त्रिशूल विनाशनि

देवी मंद सुहास वर्धिनी

हृदय हंस विराजिनि

शारदे जय हंस वाहिनी....

मधुर काव्य कला दीक्षा

प्रणव नाद विकाशनि

भगवती संगीत वरदे

भुवन मानस वासिनी

शारदे जय हंस वाहिनी.....

सिंगर - भरत कुमार दबथरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।