मत भूल अरे इंसान तू है दो दिन का मेहमान

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॥ पावन पाठ ॥

तेरी नेकी बदी ना प्रभु से छुपी सब देख रहा है भगवान

मत भूल अरे इंसान तू है दो दिन का मेहमान।

है जिसने बनाया मिठाई वही फूल कांटो के संग संग खिलाए वही

खेल जीवन मरण का रचाई वही डाले माटी के पुतले में जान

मत भूल अरे इंसान तू है दो दिन का मेहमान।

विधाता ने लिखा है उसे मान ले प्राण देता वही और वही प्राण ले

तेरे बस में है क्या बस ये जरा जान ले तू है निर्बल तो वो बलवान

मत भूल अरे इंसान तू है दो दिन का मेहमान।

तेरी नेकी बदी ना प्रभु से छुपी सब देख रहा है भगवान

मत भूल अरे इंसान तू है दो दिन का मेहमान।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।