ले चल अपनी नागरिया अवध बिहारी सांवरिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ले चल अपनी नागरिया, अवध बिहारी साँवरियाँ,

अवध बिहारी सांवरिया, लें चल अपनी नागरिया,

ले चल अपनी नागरिया, अवध बिहारी साँवरियाँ,

सरयू के तीर अयोध्या नगरी, सरयू के तीर अयोध्या नगरी,

संत भरे जहाँ गागरिया, संत भरे जहाँ गागरिया,

अवध बिहारी सांवरिया, लें चल अपनी नागरिया,

ले चल अपनी नागरिया, अवध बिहारी साँवरियाँ,

कनक भवन सिया रघुवर राजे, कनक भवन सिया रघुवर राजे,

देख भई मैं बावरिया, देख भई मैं बावरिया,

अवध बिहारी सांवरिया, लें चल अपनी नागरिया,

ले चल अपनी नागरिया, अवध बिहारी साँवरियाँ,

ले चल अपनी नागरिया, अवध बिहारी साँवरियाँ,

अवध बिहारी सांवरिया, लें चल अपनी नागरिया,

ले चल अपनी नागरिया, अवध बिहारी साँवरियाँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।