जय काली कल्याण करे

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

लफ लफ जीभ निकाली मैया, लाल लहू खप्पर में भरे,

काल नाशनी काली मैया जय काली कल्याण करे,

जय काली कल्याण करे

तीन नेत्र त्रिपुरारी जैसे, रृण्ड मुंड गल माला

गौर वरण एक रूप साथ में एक रूप है काला

एक रूप तेरा मोहित करता एक रूप को देख डरे

काल नाशनी काली मैया जय काली कल्याण,

जय काली काली जय काली

समर भूमी में नाच रही है बन कर के महाकाली

असुर मर्दनी मात भवानी पिये लहू की प्याली

रक्त बीज का बीज मिटाके ,भूमि का माँ भार हर

काल नाशनी काली मैया....जय काली कल्याण करे....

जय काली काली काली

लट बिखराई खड्ग उठाई, धधक रही है ज्वाला

मां को मनाने को आया है डम डम डमरू वाला

निकली जीभ खडग आसन में, रह गईं हाथ त्रिशूल धरे

काल नाशनी काली मैया ...जय काली कल्याण करे

जय काली काली जय काली....

कलयुग में अब भरना खप्पर, भोले ने वरदान दिया

विनती करके शिव शम्भू ने, महाकाली को शांत किया

कहे बेनाम महाकाली मां,भक्तों की सब विपत हरे

काल नाशनी काली मैया जय काली कल्याण करे

जय काली काली जय काली....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।